मजाक बना डाला सबसे असरदार संघ का

सम्माननीय पाठक, पटवारी भाई/बहिन,
क्रांतिकारी अभिवादन
जो साथी ऑनलाइन एक-दूसरे को अति अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, यह भी नहीं समझ रहे कि उनकी यह लड़ाई शासन के नुमाइंदे, अपने वरिष्ठ अधिकारी सहित आम जनता भी देख रही है। क्या सोचते होंगे ये लोग ? निश्‍चित ही इन मुट्ठी भर लोगों की यह लड़ाई हमारे संवर्ग के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। और इसकी इन्हें कोई परवाह नहीं है। पदलोलुपता में अंधे हो चुके ऐसे लोग हम पटवारियों का कितना भला कर पायेंगे, सोचनीय सवाल है।
यही लोग मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ के बड़ते प्रभाव से अपनी दुकान खतरे में देखते हुये “मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ” के बारे में दुष्प्रचार करते रहते हैं कि

यह संघ तो सरकारी है।
सरकारी लाभ ले रहा है।
सरकार के इशारों पर चलता है।
सरकार द्वारा बनाया गया है।
पटवारियों के अहित के काम कर रहा है।
पटवारियों को लाभ नहीं लेने दे रहा।
पटवारियों की हड़तालें फेल करता है।
पटवारियों की मांगें इसी संघ के कारण पूरी नहीं हो पा रहीं। आदि- आदि ..

हम बता दें वास्तविकता यह है कि ऐसे ही कुत्सित इरादे वाले और पदलोलुप स्वयं- भू नेताओं द्वारा पटवारी हितों के विरुद्द अति करने पर “मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ” अस्तित्व में आया और उसके बाद से ही पटवारी हित की शुरूआत हुई है, जिससे ये लोग बौखला गये हैं और अपनी नाकामियां छिपाने कुछ और नहीं सूझता तो “मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ” पर आरोप लगा देते हैं।
अरे भाई देश में सूचना का अधिकार लागू है, जिसकी कि हमें धमकी भी देते हो, करो ना उसका उपयोग। कौन रोक रहा है। अगर जैसा कहते हो वैसा है तो बताओ न पटवारी को सच्चाई? चुप क्यों हो जाते हो? हड़तालें कब सफल हुईं हैं?
हड़ताल शुरू करने के 4-6 दिन बाद ही मांगें पीछे हो जाती हैं और तनखा ना कटे, के बारे में सोचा जाने लगता है, जबकि प्रदेश का पटवारी अब तक इनके कहने पर कमर कसके खड़ा हो चुका होता है … और हद तो तब हो जाती है, जब लोहा गर्म जैसी बात होती है, ये लोग पता नहीं क्या करते हैं, आधी रात को आश्वासन का नाटक कर खतम का एलान कर देते हैं। ठगा रह जाता है प्रदेश का कमर कसके खड़ा हो चुका पटवारी ….
सच तो यही है कि हड़तालें केवल और केवल चंदाखोरी और अपनी नेतागिरी चमकाने का जरिया भर बन कर रह गयीं हैं।
मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ के अस्तित्व में आने के बाद इनकी यह दुकान बंद हो गयी है।
आज तहसील स्तर पर समस्यायें अधिक गंभीर हैं। प्रदेश स्तर पर हमारे संवर्ग के अधिकारों का हनन हो रहा है। और भाइयों को पदों की लड़ाई से फुरसत नहीं है।

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प्रदेश में दो रजिस्टर्ड संघ हैं। एक संघ (मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ) में जहां परिवार सा माहौल है, वहीं दूसरा संघ (क्या नाम बतायें?) में २ से अधिक व्यक्ति अपने को प्रांताध्यक्ष बता रहे हैं। यही नहीं अपनी – अपनी जम्बो जेट प्रदेश कार्यकारिणी भी घोषित कर दिये हैं। जिन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में बता रहे है, वह मना कर रहे हैं कि हमसे कोई बात नहीं हुई, हम इनके संघ में नहीं हैं।
क्या मजाक बना डाला एक सबसे असरदार संघ का?

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आजकल एक दूसरे से यह जरूर कह रहे है ” अब भी समय है एक हो जाओ ” पर सीधे-सीधे यह नहीं कहते कि तुम हम में मिल जायो, हम तुम में नहीं मिलेंगे।
हमारे कुछ साथी अभी भी तटस्थ की भूमिका में हैं और इसी बात को लेकर यह पत्र लिखने का मन बना है। पूरी उम्मीद है कि आप सब भाई लोग जरूर पूरा पढ़ेंगे और मनन भी करेंगे, ताकि पटवारी हित में कुछ कदम आगे बढ़ सकें।
सूचित करते हुये हर्ष है कि संघ की प्रतिनिधि आपकी अपनी पत्रिका “पटवारी अभिमत”मार्च २०१५ को अपने प्रकाशन के 5 वर्ष पूरे कर रही है। इस अवसर पर पत्रिका का एक अति महत्वपूर्ण बहुरंगी और ज्यादा पृष्ठ के साथ संग्रहणीय अंक प्रकाशित किया जा रहा है। अति महत्वपूर्ण इसलिये क्यों कि इसमें नाम के अनुरूप प्रदेश का आम पटवारी क्या सोचता है, के अभिमत सीधे-सीधे उनकी अपनी भाषा में बड़ी सांख्या में होंगे। साथ ही इस अंक में आप पायेंगे मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ का संविधान, मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ द्वारा अब तक हासिल की गयीं उपलब्धियों की जानकारी, मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ के उद्देश्य ….. और सबसे महत्वपूर्ण एक संघ के होते हुये क्यों दूसरा संघ बनाना पड़ा, सवाल का जबाब … दिल्ली प्रेस मध्यप्रदेश प्रभारी श्री भारत भूषण श्रीवास्तव की प्रांताध्यक्ष श्री मुकुट सक्सेना से पहली बार लम्बी बात-चीत। समस्याओं के निराकरण के लिये कारगर तरीके सहित और भी बहुत कुछ। संघ के बारे में दुष्प्रचार वाले सवालों के सीधे जबाब।
आपके पास भी कोई सवाल हैं, तो आप भी अपने सवाल, पटवारी हित में आपकी अपनी कोई राय या सुझाव यहाँ दे सकते हैं।
यहाँ कॉमेंट बॉक्स मे लिखें और हमें भेज दें या मेल करें –
patwari.abhimat@gmail.com

पटवारी हितों के लिये दृढ़-संकल्पित
आम पटवारियों का संघ “मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ”

सही समय आपके हाथ में है

मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ के अस्तित्व में आने के बाद प्रदेश में पटवारियों की अपने हितों के प्रति सक्रियता बढ़ी हैं और इसी के साथ गिरती इमेज को ब्रेक लगा है। सभी पटवारी खराब हैं, बिना पैसे के कोई काम नहीं करते, पैसा लेकर भी काम अटकाते हैं, अड़ंगा लगते हैं, ऐसा मानने वालों की संख्या में कमी आई है। आज आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है और वे पटवारी की समस्यायें भी समझ रहे हैं। जैसा कि पिछले अंक में आप देखें होंगे भोपाल से श्री राम कस्तूरे जी एवम् श्री बलभद्र मिश्रा जी के विचार। संघ की गतिविधियाँ बढ़ने के बाद से प्रदेश के विकास में बड़ी वाधा हड़तालों पर भी ब्रेक लग गया है। इसके लिये संघ सभी का धन्यवाद व्यक्त करता है।
बावजूद अभी भी “पटवारी रिश्वत लेते धराया” जैसी खबरें हमें विचलित कर रहीं हैं, वास्तव में लोग हमारे कुछ साथियों की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। कोई खिलाफ ऐसे ही नहीं होता। लोग अपने कामों को सरलता से, जल्दी निपटवाने के लिये पैसा देना अपना धर्म समझते हैं, पर उसके बाद भी वही आदमी परेशान हो जाता है, तब ऐसी घटनायें सामने आती हैं।
सरकार हमें काम के पैसे देती है, यह अलग बात है कि कम देती है, तो पूरा पैसा हमे उससे ही लेना होगा, जो कि सही रास्ता है। लेकिन इस तरह की समस्याओं के लिये 5% पटवारी साथी भी इकट्ठा नहीं होते, तब सरकार भी कैसे माने कि हमे कम पैसा मिल रहा है।
जब तक हम एक सही रास्ते पर, सही विचारधारा “जियो और जीने दो” के साथ एकजुट होकर एक बड़ी ताकत नहीं बनते, तब तक ऐसा चलता रहेगा। मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ में विश्वास व्यक्त करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि संघ आपके विश्वास पर खरा उतरेगा। सोचें सम्मानजनक और निश्चिंतता की जिंदगी जीना चाहते हैं या ” कटेगा खरबूजा ही” वाली।
अपने अंदर वास्तविक जागरूकता लायें। त्याग के लिये भी तैयार हों। आप तक्नीकी पद पर कार्य कर रहे हैं, तक्नीकी पद घोषित क्यों नहीं होगा?
आपसे दो या दो से अधिक पटवारी हल्का पर कार्य लिया जा रहा है, निश्चित ही अतिरिक्त वेतन का हक बनता है, क्यों नहीं मिलेगा?
… और यात्रा भत्‍ता “ऊँट के मुंह में जीरा” आप चाहेंगे तो ऐसा नहीं चलेगा।
हम वास्तविक हक लेकर रहेंगे। राष्‍ट्र हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम।
सही समय आपके हाथ में है।
आज ही मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ से जुड़ें,
अपना खोया सम्मान, पुरानी प्रतिष्ठा वापिस हासिल करें।
सदस्यता के लिये लॉग ऑन करें –

http://mppatwari.com/

 “जय मध्यप्रदेश”

– मुकुट सक्सेना

(“पटवारी अभिमत” दिसंबर अंक से)

ladna-padhna

इस उजाले से हो जहाँ रोशन

सौभाग्य की बात कि अन्नदाता की सेवा का अच्छा अवसर हमें मिला
ग्वालियर में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती सूफिया फारूकी वली के विदाई समारोह में संभाग आयुक्त श्री के के खरे जी ने बहुत ही बढ़िया बात कही है, यहाँ उल्लेेख करना जरूरी समझता हूँ। उन्होंने कहा अच्छा अधिकारी बनने के लिये पहले अच्छा इंसान होना जरूरी है। आज लगभग हर रोज हम ऐसी खबरें पढ़ रहे हैं, जिनमे हमारे साथी पटवारी भाईयों के रिश्वत लेते पकडे जाना, आम लोगों की समस्यायों के प्रति गंभीर न रहने की बातें और विभिन्न कारणों से उन पर हमला। और इससे वरिष्ठ अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। इस तरह की खबरें एक अंतहीन सिलसिला बन गयीं हैं। ऐसे में हमें इस दिशा में श्री खरे जी की बात पर अवश्य ही सोचना होगा। हम अच्छा काम करें, काम बोलता है। अच्छा काम अलग दिखता है।
कलेक्टर शहडोल डा. अशोक कुमार भार्गव जी से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। वे अपने पदीय कर्तव्यों के अतिरिक्त निरन्तर समाज सेवा के अपने कार्यों से एक समाज सेवक के रूप में उभर रहे हैं। चाहे स्कूल हों, आंगनबाड़ी हों, दूर दराज के ग्रामीण गरीव किसान सबके पास पहुँच कर उनकी समस्याएं सुनते हैं और हल करते हैं। जिले में उन्होंने एक अच्छे कलेक्टर से ज्यादा अच्छे इंसान की छबि अपने अच्छे कार्यों से बना ली है।
हम भी चाहें तो एक अच्छे इंसान बन सकते हैं। हम प्रयास करें कि किसान दिन-रात मेहनत करके खेत में अनाज का उत्पादन करता है, लेकिन मेहनत के अनुरूप सफलता उसे नहीं मिलती। हम किसानों को उन्नत खेती के तरीके बता कर खेती को लाभ का धंधा बनाकर उसकी खुशहाली ला सकते हैं। खेती को लाभ का धंधा बनाने शासन की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं , हम थोड़ा इस तरफ भी ध्यान देकर धान, प्याज, लहसुन, आलू और मक्के के अलावा सब्जियों की उन्नत खेती, खेत तालाब बनाने आदि के लिये किसानो को प्रेरित कर ऐसा कर सकते हैं।
किसानों का विकास, गाँवों का विकास सबसे ज्यादा आवश्यक है। जहाँ स्वच्छता हो, सुंदरता हो, वहां समृद्धि आती है. लक्ष्मी का वास होता है। हम इस दिशा में कार्य कर सकते हैं। गाँव में पशुपालन, वृक्षारोपण, स्वच्छता, स्वास्थ्य , शिक्षा, कुप्रथाएं, बेटा-बेटी में भेदभाव न करने जैसे कार्यों के लिए हम अच्छे प्रेरक हो सकते हैं। यदि ऐसे कार्य करते हैं तो स्वयं को भी अच्छा लगेगा।
यह बड़े ही सौभाग्य की बात है कि कृषि प्रधान देश में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति किसान के सर्वाधिक करीब हम हैं। हमें शासकीय सेवा के साथ-साथ अन्नदाता किसान की सेवा के रूप में एक अच्छा अवसर समाज सेवा का मिला है। इस दिशा में सोचें। इस दिशा में काम करें। अब आप सोच रहे होंगे, भैया पहले से क्या कम काम हैं, जो आप यह सब बता रहे हो, ऐसा न सोचें। काम की अधिकता हर तरफ हैं। पर हम कुछ समय मैनेज कर यदि ऐसा कुछ भी करते हैं तो एक अलग इमेज बनेगी। अभी जो इमेज है, उसका खामियाजा हम भुगत रहे हैं।
हमारी समस्यायों के लिए हमें मिलकर योजना बनाना होगी। इसके लिए मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ अपने स्तर से लगा हुआ है। आपसे सहयोग अपेक्षित है।
…. और अंत में युवा कवि चेतन राम कृष्ण ” देव ” की लाइनें ” इस उजाले से हो जहाँ रोशन, आओ दीये की तरह जल जाओ ”
प्रकाश सब ओर फैले, इसी आशा और उम्मीद के साथ
– मुकुट सक्सेना

पटवारी का इतिहास

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– संजीव खुदशाह
आज पटवारी भारत के जन मानस का एक महत्वपूर्ण अंग है। कोई भी गांव की कहानी पटवारी के जिक्र के बिना पूरी नही होती। लोक गीत लोक-कथाओं में इसकी मौजूदगी गहरे पैठ को दर्शाती है। पहले पटवारियों के पास दो कोड़ेदार, ग्राम कोतवाल और घोड़े हुआ करते थे।
भारत के ज्ञात इतिहास में सर्वप्रथम भूमि को नाप कर उसका हिसाब किताब रखने का कार्य बादशाह शेर शाह सूरी ने 1537 मे किया था इसी ने ज़मीन मामले की देखरेख हेतु पटवारी पद की स्थापना की। इस हेतु बादशाह का मुख्य उद्देश्य‍य भूमि पर लगान वसूली एवं बकाया का इसाब रखना था, जिसके लिए भूमि का हिसाब रखना जरूरी था। इसलिए पटवारी, शासन एवं निज़ी भूमि यों के कागज़ात का संधारण करता था साथ ही लगान वसूली करता था। शेर शाह सूरी के बाद मुग़लों ने भी इस भू प्रबंध को जारी रखा। अकबर के नवरत्नो में से एक टोडरमल खत्री ने इसे और सुढ़ड किया। इस समय देश के कौन से खेत में कौन सा फसल बोया गया है और किस भूमि का कितना लगान है इन सबका वर्षवार लेखा जोखा रखा जाता था। जिसे जिन्सवार कहते है। जब भारत में अंग्रेज़ों का शासन था तो उन्हे लाल किले से कई ट्रक कागज़ात मिले उसे डिस्पोज करते समय जांच में पाया गया कि करीब दो से तीन सौ साल तक के जिन्सवार भरे पड़ें थे। वे चकित थे और इन कागजातो को सहेज कर रखा। उल्लेखनीय है कि आज भी राजस्व विभाग द्वारा जिन्सवार उसी तरह बनाया जाता है। जिनके आधार पर फसल का पूर्वानुमान और राष्ट्रीय नीति तैयार होती है। यहां यह भी बताया जाना जरूरी प्रतीत होता है कि राजस्व विभाग में प्रयुक्त शब्दावली हूबहू उसी काल की प्रयोग कि जाती है जैसे- पटवारी, तहसीलदार, नाईब तहसीलदार, कानूनगो, वासील वाकी नवीस, जमादार, हल्का, खसरा, खतौनी, चिटठा, तितम्मा आदी।
पटवारी या उससे मिलती जुलती प्रणाली पूरे विश्व‍व में अपनाई जाती है। किंतु पाकिस्तान, बांगलादेश, नेपाल सहित कुछ देशों में पटवारी शब्द आज भी प्रचलित है। वही भारत कुछ हिस्से में पटवारी को अन्य नामो से भी पुकारा जाता है। जैसे गुजरात महाराष्ट्र में कुलकर्णी अब तलाठी, तमिलनाडु में पटवारी अब कर्णम अधिकारी, पंजाब में पटवारी को ‘पिंड दी मां’ गांव की मा भी कहा जाता है,आंध्रप्रदेश में अब पटवारी को आर.ई.ओ. यानी ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी कहा जाता है, वही राजस्थान में पहले पटवारियों को हाकिम साबहु कहा जाता था। उत्तर प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल से खफा होकर तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह ने यह पद ही समाप्त कर दिया। लेकिन बाद में उन्हे लेख पाल के नाम से पुनः बहाल करना पड़ा। उत्तराखण्ड में पटवारी को पुलिस के भी अधिकार प्राप्त है। उन्हे राजस्व पुलिस कहा जाता है। राज्य के 65 फीसदी हिस्से में अपराध नियंत्रण, राजस्व संबंधी कार्यो के साथ ही वन संपदा की हकदारी का काम पटवारी ही सभांल रहे है।
पटवारियों के बारे में कोई केन्द्रीय कृत आंकड़ा नही है। राजस्थान में 10,685 पटवारी है तो मध्यप्रदेश में 11,622 छत्तीसगढ़ में लगभग 3200 वही उत्तर प्रदेश में 27,333 है। छत्तीसगढ़ का भूमि अभिलेख इंटरनेट पर मौजूद है तथा पटवारियों को 10 वर्ष पहले कम्प्यूटर दिये गये थे। लेकिन नई हल्का बंदी होने के कारण पटवारियों की संख्या काफी बढी है, जिन्हे कम्प्युटर प्रदाय किया जाना है।
भूअभिलेख संहिता के अनुसार एक पटवारी को एक निश्‍चित खाते का एक हल्का दिया जाना चाहिए। ग्रामीण इलाके में नई हल्का बंदी होने के कारण स्थिति ठीक हो गई, लेकिन शहरी इलाके में हल्का बंदी नही होने के कारण स्थिति विकट है। यहां हजारों खाते में एक पटवारी नियुक्त है इस कारण कार्य का बोझ और त्रूटी की संभावनाएं बढ़ जाती है। छत्तीसगढ़ मे ये शहरी इलाके आज भी नई हल्का बंदी का इंतजार कर रहे है।
ये सुखद है 475 वर्ष पुराना पटवारी हमेशा अपने आपको नई तकनीक एवं व्यवस्था के अनुरूप अपडेट किया है। लेकिन भारत की भू प्रबंधन प्रणाली कई मायने में पीछे चल रही है। उसे विकसित देशों के अनुरूप बंदोबस्त को अधतन करना होगा।

किसान से रखें आत्मीय सम्बन्ध

यदि पटवारी ग्रामवासियों/कृषकों से आत्मीय सम्बन्ध बना ले तो इससे कई समस्यायों के निराकरण में सकारात्मक परिणाम सामने आना निश्चत है. आज भी किसान पटवारी को बहुत कुछ मानकर चलता है, जब हम ग्राम भ्रमण के समय उसके घर भोजन करते हैं, तब वह अपने को धन्य समझता है. इसके बाबजूद कुछ गलत विचारधाराओं में पड़कर हमारा व्यवहार उसके प्रति गड़बड़ी के रूप में यदा-कदा सामने आता रहता है, हमें चाहिए हम इस पर कंट्रोल करें. उसके प्रति और ज्यादा ध्यान रखकर काम करने की आज महती आवश्यकता है.  

rasoi

 हम गाँव में अच्छे  समाजसेवी साबित हो सकते हैं. हम अपना काम राजस्व तक सीमित न रखते हुए गाँव में सामाजिक कुरीतियों धूम्रपान,नशामुक्ति जैसी बुराइयों  के खिलाफ काफी अच्छा काम कर सकते हैं. हम गाँव को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर “हमारा मध्यप्रदेश,स्वच्छ प्रदेश, स्वच्छ गाँव, स्वच्छ नागरिक” में अच्छा योगदान कर सकते हैं. साथ  ही इस तरह काम करने से जो प्रसन्नता मिलेगी उससे आपको भी एक अलग ऊर्जा मिलेगी. आपका मन अन्दर तक खिल उठेगा.
कोई आपके हलके का कृषक बीमार हो आप उसे देखने अस्पताल तक चले जाएँ, संभब सहायता करें, तो उसके स्वस्थ  होने की दिशा में अनुकूल प्रभाब पड़ता है, आपको भी इसका लाभ महसूस अवश्य होगा.
मुझे गर्व है कि हमारे कई साथी इस दिशा में काम कर रहे हैं, विशेषकर नए युवासाथियों से उम्मीद करता हूँ कि वे इस दिशा में और प्रगति लायेंगे..
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